History

कुलदेवी: कपासन माता गोत्र: खूंटेटा Share on

कपासन माता को सती माता के रूप में माना जाता है। उनका विवाह खूंटेटा गोत्र में हुआ था। यह स्थल श्मशान क्षेत्र के समीप स्थित है तथा विराटनगर क्षेत्र से जुड़ा हुआ माना जाता है, जिसका संबंध पांडवकालीन इतिहास से बताया जाता है।
दिल्ली निवासी श्री संतोष जी द्वारा वर्ष 1976 में मंदिर का निर्माण कराया गया। वर्ष 1998 में ट्रस्ट का गठन हुआ। वर्तमान में दानदाताओं के सहयोग से लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से मंदिर परिसर का विकास एवं निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है, जिससे यह स्थान अब एक सुव्यवस्थित एवं दर्शनीय धार्मिक स्थल बन गया है।

राजस्थान, जयपुर जिले में

शाहपुरा – अलवर रोड पर

बैराठ (बैराठगढ़) के पास मेड (Med) गाँव में कपासन माता का प्राचीन मंदिर स्थित है।

माता के स्थान पर नवरात्रों में विशेष पूजा, परिवारिक कल्याण और सुरक्षा की कामनाएँ की जाती हैं।

कैसे पहुँचें:

जयपुर → शाहपुरा → बैराठ → मेड गाँव

बैराठ से थोड़ी दूरी पर मंदिर का मार्ग स्थानीय लोगों से आसानी से मिल जाता है

कपासन माता (कप्तान माता) – ऐतिहासिक एवं पांडवकालीन धाम

आदरणीय डॉ. दयालाल जी खंडेलवाल (खूंटेटा) धानेरा गुजरात द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कपासन माता का यह धाम अत्यंत प्राचीन, पांडवकालीन और ऐतिहासिक महत्व का स्थान है।

???? स्थान

मेड गाँव से 2 किलोमीटर दूर,

क्षेत्र का नाम: बाणगंगा

जिला: जयपुर (शाहपुरा – अलवर रोड), बैराठ के पास।

⛰️ पांडवकालीन प्रमाण – यह स्थान क्यों विशेष है?

यह स्थान पांडवों के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। कई प्राचीन अवशेष आज भी मौजूद हैं:

 1. पांडवों की छत्रियाँ

पांडवों के निवास और उनके अज्ञातवास के प्रमाण के रूप में यहाँ छत्रियाँ स्थित हैं।

 2. भीम की घंटी

मंदिर परिसर में वह प्रसिद्ध घंटी है, जिसे पांडवों के समय की माना जाता है।

?‍♂️ 3. पांडवों की बावड़ी (स्विमिंग पूल)

यह प्राचीन बावड़ी पांडवकालीन जल–वास्तुकला का प्रमाण मानी जाती है।

 4. बाणगंगा की कथा

जब पांडव यहाँ रुके, तब अर्जुन ने पानी की आवश्यकता होने पर तीर चलाकर इस स्थान पर गंगा को प्रकट किया
इसी कारण इस क्षेत्र का नाम बाणगंगा पड़ा।

⚙️ 5. पांडवों की चक्की

यहाँ वह पुरानी चक्की भी आज तक मौजूद है, जिसका उपयोग पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान किया।

⛩️ मंदिरों का अद्भुत समूह

कपासन माता धाम के आसपास अनेक प्राचीन मंदिर हैं:

शिवजी का प्राचीन मंदिर

भगवान राम और कृष्ण का मंदिर

अत्यंत दुर्लभ — ब्रह्मा जी का प्राचीन मंदिर
(ऐसे मंदिर भारत में बहुत कम हैं; प्रमुख रूप से पुष्कर मेंकपासन माता मंदिर

यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और खूंटेटा गोत्र की कुलदेवी के रूप में प्रतिष्ठित है।

माता का यह स्थल ऐतिहासिक, धार्मिक, पौराणिक और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है।

 सुविधाएँ (धर्मशाला)

धाम पर एक आधुनिक धर्मशाला उपलब्ध है:

कुल 20 कमरे

भोजन–प्रसाद की व्यवस्था

स्वच्छ एवं सुगम स्थान

भक्तों के रहने हेतु सभी व्यवस्थाएँ उपलब्ध

इस धर्मशाला के संस्थापक ट्रस्टी
???? श्री सत्यनारायण जी खुटेटा हैं।

 पूजा-पाठ व पर्व

फाल्गुन/फरवरी मास की पूर्णिमा को पाटोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।

वर्षभर पूजा, भोग, दर्शन की व्यवस्था रहती है।

 

 

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