History
लाला रघुमल जी खंडेलवाल — समाज जागरण के अग्रदूत Share on
खंडेलवाल समाज के इतिहास में अनेक ऐसे महापुरुष हुए जिन्होंने अपने समय, धन और जीवन को समाज उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्हीं महान विभूतियों में एक नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है — लाला रघुमल जी खंडेलवाल (मुखमारिया), देहली।
वे केवल एक दानवीर ही नहीं, बल्कि समाज संगठन, शिक्षा प्रसार और सामाजिक जागरण के प्रखर सूत्रधार थे। उस दौर में, जब समाज संगठित रूप में अपनी पहचान बनाने का प्रयास कर रहा था, तब लाला रघुमल जी ने दूरदृष्टि, सेवा भावना और त्याग के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य किया।
समाज सेवा का स्वर्णिम अध्याय
सन् 1920 में इन्दौर में आयोजित खंडेलवाल समाज के तृतीय अधिवेशन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उस समय समाज को व्यवस्थित करने हेतु जो कार्य किए गए, उनमें उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है।
उनके प्रमुख कार्यों में —
समाज की जनगणना
शिक्षा का प्रचार-प्रसार
बोर्डिंग हाउस निर्माण
154 घरों की छानबीन एवं सामाजिक सर्वेक्षण
जैसे अत्यंत कठिन और दूरगामी प्रभाव वाले कार्य सम्मिलित थे।
उस युग में जब संचार और संसाधनों का अभाव था, तब इतने व्यापक स्तर पर समाज को जोड़ना असाधारण प्रयास माना जाता है।
शिक्षा के महान संरक्षक
लाला रघुमल जी का सबसे बड़ा योगदान शिक्षा क्षेत्र में माना जाता है।
उन्होंने अपनी निजी संपत्ति का बड़ा भाग समाज सेवा और शैक्षणिक कार्यों हेतु समर्पित किया।
उनके दान का उपयोग —
विद्यालय निर्माण
छात्रवृत्तियाँ
कॉलेज निर्माण
विद्यार्थियों के आवास
शिक्षा प्रचार
जैसे कार्यों में हुआ।
कहा जाता है कि पुरानी दिल्ली में उनके नाम से विद्यालय एवं संस्थान स्थापित हुए, जो आज भी उनकी सेवा भावना की स्मृति को जीवित रखते हैं।
दूरदर्शी समाज निर्माता
लाला रघुमल जी समझते थे कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति केवल धन नहीं, बल्कि शिक्षा, संगठन और संस्कार होते हैं।
इसी कारण उन्होंने समाज को केवल आर्थिक रूप से नहीं, बल्कि वैचारिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया।
उनकी कार्यशैली में सेवा, पारदर्शिता और समाज के प्रति समर्पण स्पष्ट दिखाई देता था।
वर्तमान समाज के लिए प्रेरणा
आज जब समाज विभिन्न चुनौतियों, आपसी मतभेदों और संगठनात्मक कमजोरियों से जूझ रहा है, तब लाला रघुमल जी जैसे महापुरुषों का जीवन हमें प्रेरित करता है कि —
समाज सेवा त्याग मांगती है,
संगठन विश्वास से बनते हैं,
और शिक्षा ही समाज की वास्तविक उन्नति का आधार है।
ऐसे महापुरुषों का इतिहास केवल स्मरण के लिए नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को दिशा देने के लिए संरक्षित किया जाना चाहिए।
विनम्र श्रद्धांजलि
खंडेलवाल समाज सदैव लाला रघुमल जी खंडेलवाल के योगदान का ऋणी रहेगा।
उनका जीवन समाज सेवा, दानशीलता और संगठन शक्ति का अनुपम उदाहरण है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आने वाली पीढ़ियाँ उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देती रहें।
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डॉ. अशोक खंडेलवाल
चिकित्सा संसार
