*फिल्मों का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव — मेहंदी कहाँ से आई*  Share on

*फिल्मों का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव — मेहंदी कहाँ से आई* ?

मोनिग वाक,टाक,लाफ टापिक

एक वीडियो आपने अवश्य देखा होगा, जिसमें एक पिता दुल्हन के दूसरे ही दिन गायब हो जाने पर पंडित जी को दोष देता है। पंडित उत्तर देता है —
“तूने सारे काम बिना मुहूर्त के किए, अब परिणाम मुझसे क्यों पूछता है?”

ताराचंद जी बड़जात्या की राजश्री प्रोडक्शंस ने विवाह को एक नए रूप-रंग में प्रस्तुत किया, जिसका परिणाम आज हम समाज में देख रहे हैं। विवाह आज देश की सबसे बड़ी इंडस्ट्री बन चुका है।

इन फिल्मों ने वैवाहिक जीवन और संस्कारों पर गहरा प्रभाव डाला —
*दुल्हन वही जो पिया मन भाए (1977)*
*नदिया के पार (1982)*
*हम आपके हैं कौन (1994)*
*हम साथ-साथ हैं (1999)*
*विवाह (2006)*

इनके माध्यम से कई रस्मों को विशेष महत्व मिला:

प्रमुख रूप से दर्शाई गई परंपराएँ —
• रोका / सगाई (वाग्दान) — परिवारों की सहमति और वचनबद्धता
• हल्दी / मेहंदी — सौभाग्य और शुद्धि का प्रतीक
• बारात का स्वागत — सम्मान और सामाजिक गरिमा
• कन्यादान — वैदिक विवाह का अत्यंत पवित्र संस्कार
• हवन व सप्तपदी — सात वचनों का भावनात्मक महत्व
• विदाई — पारिवारिक संवेदनाओं का चरम रूप

पहले विवाह प्रायः एक ही दिन में सम्पन्न हो जाते थे, जहाँ मुख्यतः भारतीय सोलह संस्कारों का पालन होता था। ये संबंध जन्म-जन्म तक निभाए जाते थे।
आज आधुनिकता के प्रभाव से विवाह के साथ ही *विवाद पहली चिंता* बन गया है।
क्यों?
क्योंकि हम पारिवारिक संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं।

आज हम —
???? प्री-वेडिंग शूट को प्राथमिकता देते हैं
???? मेहंदी को मुख्य रस्म बना चुके हैं

???? महिला संगीत का माडर्न रूप देख रहे है

पर क्या यह भारतीय शास्त्रीय विवाह प्रणाली का मूल अंग है?

मेहंदी का पौधा प्राचीन रूप से मिश्र (मिस्र), अरब और सिंधु क्षेत्र में पाया जाता था। भारत में इसका उपयोग लगभग 3000–4000 वर्षों से है,
परंतु *ऋग्वेद और यजुर्वेद में मेहंदी का विवाह की अनिवार्य विधि के रूप में स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता* ।

 

*हमारे शास्त्रीय विवाह संस्कार*

1️⃣ वरण — वर-वधू का चयन (गुण, कुल, संस्कार पर आधारित)
2️⃣निश्चय-तिलक (वाग्दान) — सार्वजनिक स्वीकृति
3️⃣मंडप स्थापना व गणेश पूजन
4️⃣वर-आगमन व स्वागत
5️⃣वरमाला (जयमाला)
6️⃣कन्यादान — महादान कहा गया है
7️⃣पाणिग्रहण — “धर्मे चार्थे च कामे च…”
8️⃣हवन व लाजहोम
9️⃣सप्तपदी — विवाह का निर्णायक क्षण

*सात वचन*:
अन्न, शक्ति, संपन्नता, सुख-दुःख में साथ, संतान, स्वास्थ्य, मित्रता व निष्ठा

???? सिंदूरदान व मंगलसूत्र
1️⃣1️⃣ आशीर्वाद
1️⃣2️⃣ विदाई

 

???? *शास्त्रों के अनुसार अनिवार्य विधियाँ*:

✅ कन्यादान
✅ पाणिग्रहण
✅ अग्नि हवन
✅ सप्तपदी

इनके पूर्ण होते ही विवाह संस्कार सिद्ध माना जाता है।

 

आज आवश्यकता है कि हम दिखावे से हटकर *संस्कारों की ओर लौटें*।
फिल्मी चमक नहीं — शास्त्रीय मजबूती ही विवाह को जीवनभर निभाती है।

*आज अवश्य चिंतन करें* ।

*डॉ. अशोक खंडेलवाल*
*चिकित्सा संसार*
*खंडेलवाल तकनीकी विकास समिति*
*???? 9399008071*