आजादी की एक खंडेलवाल नायिका Share on

रमा खंडेलवाल (Rama Satyendra Khandwala) एक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और बाद में देश की प्रसिद्ध पर्यटक गाइड थीं। उन्होंने आज़ाद हिंद फौज (Indian National Army) की रानी झाँसी रेजिमेंट में सेनानी के रूप में भाग लिया और वहाँ सेकंड लेफ्टिनेंट (Second Lieutenant) के पद तक पहुंचीं।

उनकी प्रमुख जानकारी

रमा खंडेलवाल का जन्म 3 दिसंबर 1926 को बर्मा (अब म्यांमार) के रंगून में हुआ था।

17 वर्ष की आयु में उन्होंने और उनकी बहन नीलम ने रानी झाँसी रेजिमेंट में एक सेपॉय के रूप में प्रवेश किया।

ज़ल्दी ही उन्हें सेकंड लेफ्टिनेंट के रूप में पदोन्नत किया गया और उन्होंने लगभग 30 महिलाओं (रानियों) का नेतृत्व किया।

रानी झाँसी रेजिमेंट भारतीय आज़ादी के लिए सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली महिलाओं की इकाई थी।

स्वतंत्रता संग्राम के बाद वे भारत में रहीं और मुंबई में एक प्रसिद्ध और पुरस्कृत पर्यटक गाइड के रूप में काम किया।

रमा खंडेलवाल को आज़ाद हिंद फौज की महिला युद्धशील इकाई में साहसी भूमिका निभाने के लिए याद किया जाता है, और वे स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मानित थीं।

“* * स्वतंत्रता संग्राम के बाद वे भारत में रहीं और मुंबई में एक प्रसिद्ध और पुरस्कृत **पर्यटक गाइड** के रूप में काम किया। रमा खंडेलवाल को आज़ाद हिंद फौज की महिला युद्धशील इकाई में साहसी भूमिका निभाने के लिए याद किया जाता है, और वे स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मानित थीं।”

रमा खंडेलवाल से संबंधित प्रमुख तथ्य:

सेकंड लेफ्टिनेंट:
रमा खंडेलवाल आज़ाद हिंद फौज में सेकंड लेफ्टिनेंट के पद पर रहीं। यह पद उन्होंने अपनी योग्यता, नेतृत्व क्षमता और अनुशासन के बल पर प्राप्त किया।

रानी झाँसी रेजिमेंट:
उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित महिलाओं की सैन्य टुकड़ी रानी झाँसी रेजिमेंट में सक्रिय सेवा दी। यह रेजिमेंट स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की सशक्त भूमिका का ऐतिहासिक उदाहरण है।

निःस्वार्थ सेवा और त्याग:
वे एक समृद्ध परिवार से थीं, किंतु देश की आज़ादी के लिए उन्होंने सुख-सुविधाओं और निजी जीवन का त्याग कर राष्ट्रसेवा को प्राथमिकता दी।

युद्ध क्षेत्र की नर्स:
उन्होंने फ्रंटलाइन अस्पतालों में घायल सैनिकों की सेवा की और साथ ही अन्य महिलाओं को युद्ध के लिए तैयार होने हेतु प्रेरित किया।

स्वतंत्रता के बाद का जीवन:
स्वतंत्रता संग्राम के पश्चात वे भारत में रहीं और मुंबई में एक प्रतिष्ठित व सम्मानित पर्यटक गाइड के रूप में कार्य किया। उनके योगदान को जीवन के उत्तरार्द्ध में भी सम्मान मिला।