???? “ *चमकता ब्रांड, बिखरता समाज — खंडेलवाल की सच्चाई* ”
*क्या सचमुच हम नहीं बदल सकते*?
*यह दुनिया का नजरिया है —“स्वयं बदल जाओ*।”
पर क्या समाज का नजरिया कभी बदलेगा?
क्या भगवान ने भी भक्त और भीड़ के अनुसार अपना स्वरूप नहीं बदला?
तो फिर हम क्यों नहीं बदल सकते?
*पुष्कर जी बाहेती, जो सम्पूर्ण माहेश्वरी समाज की पत्रिका के प्रकाशक हैं, अक्सर कहते हैं* —
“अशोक जी, आपने ‘चिकित्सा संसार’ हेल्थ मीडिया द्वारा जो सेवा की है, उसकी पीड़ा मैं समझ सकता हूँ…
*बगेर विज्ञापन के सेवा आज लोहे के चने चबाने जेसा है*
*पर कुछ लोग तो यही चर्चा करते हैं—करोड़ों कमा लिए*!”
खंडेलवाल राजनीति में अग्रणी, व्यापार में अग्रणी, शिक्षा में अग्रणी, व्यवहार में भी अग्रणी।
यदि कहीं पीछे हैं — तो परिवार में, सामाजिक एकता में, और अपने ही समाजबंधुओं के साथ व्यवहार में।
हमारी एक ही कमजोरी हमारी सारी गुणवत्ता को पीछे धकेल देती है।
यदि मीडिया और मार्केट में देखें — तो “खंडेलवाल ब्रांड” चमकता है।
पर यदि समाज के भीतर झांकें — तो उसी ब्रांड पर धब्बों की भरमार दिखाई देती है।
कुछ लोग तो यह मानने को भी तैयार नहीं कि खंडेलवाल समाज बदल सकता है।
हम टांग खींचने की कला में स्वर्ण पदक जीत सकते हैं।
देश के हर कोने से मुझे फोन आते हैं।
*गुजरात के दियोदर से 80 वर्षीय वरिष्ठ समाजसेवी श्री चुन्नीलाल जी खूंटेटा, हरियाणा, राजस्थान सहित अनेक बंधु कहते हैं* —
“हमने पूरा भारत घूम लिया, खंडेलवाल नहीं बदल सकता।”
उन्होंने सामाजिक प्रताड़ना की पीड़ा झेली होगी,
कित्नु मेने तो खून के घुटो को भी अम्रत समझ जितना दंश मैंने पिछले दस वर्षों में झेला है उसे शब्दों में उकेरना उचित नही.
कभी सेवा भाव को धंधा कहा गया,
कभी समाज से ही बाहर करने की कोशिश की गई।
कोई आयोजन हो — तो पहले ही चोट कर दी जाती है कि उसमें कोई न पहुँचे।
व्यापार से लेकर व्यक्तिगत जीवन तक कथाएँ गढ़ दी जाती हैं।
सैकड़ों साथी, जो कभी साथ थे, समाजसेवा दंश से हाथ जोड़ चुके हैं।
फिर भी एक विश्वास शेष है।
मेरा एक ही कथन है —
“*समाज मेरा शरीर है* ।”
यदि शरीर को कैंसर हो जाए —
तो क्या हम आत्महत्या कर लेते हैं?
नहीं।
इलाज करते हैं।
चाहे जीवन भर की कमाई लग जाए,
चाहे पुरखों की जमा पूँजी खर्च हो जाए।
व्यक्ति कैंसर से हार सकता है —
पर इलाज करना उसका कर्तव्य है।
अंतिम सांस तक यही प्रार्थना रहेगी —
हे प्रभु,
मेरा समाज बदलेगा।
मेरा बंधु जागेगा।
स्वर्णिम युग लौटेगा।
– डॉ. अशोक खंडेलवाल
चिकित्सा संसार
खंडेलवाल तकनीकी विकास समिति
9425092492
Like 0
Comments 0
February 16, 2026
*समाज को कैंसर है — क्या हम इलाज करेंगे या मृत्यु की प्रतीक्षा* ?
???? “ *चमकता ब्रांड, बिखरता समाज — खंडेलवाल...
February 13, 2026
???? देर से विवाह — जब जवानी ढलती है और समाज टूटता है
बंधुओं! मातृशक्तियों! युवा साथियों!
आज...
February 11, 2026
*फिल्मों का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव — मेहंदी कहाँ से आई*
*फिल्मों का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव —...
January 29, 2026
आजादी की एक खंडेलवाल नायिका
रमा खंडेलवाल (Rama Satyendra Khandwala) एक भारतीय...
